दरभंगा जिले का परिचय ----

   दरभंगा जिले का परिचय ----



दरभंगा जिला---- दरभंगा जिला दरभंगा प्रमंडल का हिस्सा है। जिले का प्रशासनिक मुख्यालय दरभंगा शहर है जी बागमती नदी के तट पर बसा है ।    इस जिले में 3 अनुमंडल दरभंगा सदर, बेरौल, बेनीपुर  हैं।  यहाँ  18 प्रखंड और 18  अंचल हैं।  जिले में कुल 329 पंचायत, 1,269 गांव एवं 23 पुलिस  थाने हैं। जिले के भीतर 3 संसदीय निर्वाचन क्षेत्र और 10 विधानसभा क्षेत्र हैं। दरभंगा जिले का गठन 1 जनवरी १८७५ को हुआ | दरभंगा  25.63 – 25′.27 उत्तर और ८५.४० – ८६.25 पूरब में अवास्थित है | इसके उत्तर में मधुबनी, दक्षिण में समस्तीपुर , पूरब में सहरसा तथा पश्चिम में सीतामढ़ी एवं मुजफ्फरपुर जिला है | इस जिले का भौगौलिक क्षेत्रफल २२७९.29 बर्ग किलोमीटर में है | दरभंगा के उत्तर में मधुबनी , दक्षिण में समस्तीपुर , पूर्व में सहरसा  एवं पश्चिम में मुजफ्फरपुर  तथा सीतामढ़ी  जिला है। दरभंगा  शहर 16वीं सदी में स्थापित दरभंगा राज की राजधानी थी । अपनी प्राचीन संस्कृति और बौद्धिक परंपरा के लिये यह शहर विख्यात रहा है। इसके अलावा यह जिला आम और मखाना के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।

दरभंगा शब्द संस्कृत के शब्द द्वार और बंग से बना है जिसका अर्थ है बंगाल का द्वार।  दरभंगा  त्रेते युग का शहर है जो मिथिला का अंग है।  

वेद और पुराण के अनुसार  आर्यों की विदेह शाखा ने अग्नि के संरक्षण में सरस्वती तट से पूरब में सदानीरा (गंडक) की ओर कूच किया और विदेह राज्य की स्थापना की। विदेह के राजा मिथि के नाम पर यह प्रदेश मिथिला कहलाने लगा। रामायणकाल में मिथिला के एक राजा जो जनक कहलाते थे, सिरध्वज जनक की पुत्री सीता थी। विदेह राज्य का अंत होने पर यह प्रदेश वैशाली गणराज्य का अंग बना। इसके पश्चात यह मगध के मौर्य, शुंग, कण्व और गुप्त शासकों के महान साम्राज्य का हिस्सा रहा। १३ वीं सदी में पश्चिम बंगाल के मुसलमान शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास के समय मिथिला एवं तिरहुत क्षेत्रों का बँटवारा हो गया। उत्तरी भाग जिसके अंतर्गत मधुबनी, दरभंगा एवं समस्तीपुर का उत्तरी हिस्सा आता था, सुगौना के ओईनवार राजा कामेश्वर सिंह के अधीन रहा। ओईनवार राजाओं को कला, संस्कृति और साहित्य का बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। कुमारिल भट्ट, मंडन मिश्र, गदाधर पंडित, शंकर, वाचास्पति मिश्र, विद्यापति, नागार्जुन आदि महान विद्वानों के लेखन से इस क्षेत्र ने प्रसिद्धि पाई। ओईनवार राजा शिवसिंह के पिता देवसिंह ने लहेरियासराय के पास देवकुली की स्थापना की थी। शिवसिंह के बाद यहाँ पद्मसिंह, हरिसिंह, नरसिंहदेव, धीरसिंह, भैरवसिंह, रामभद्र, लक्ष्मीनाथ, कामसनारायण राजा हुए। शिवसिंह तथा भैरवसिंह द्वारा जारी किए गए सोने एवं चाँदी के सिक्के यहाँ के इतिहास ज्ञान का अच्छा स्रोत है।
दरभंगा शहर १६ वीं सदी में दरभंगा राज की राजधानी थी। १८४५ इस्वी में ब्रिटिश सरकार ने दरभंगा सदर को अनुमंडल बनाया और १८६४ ईस्वी में दरभंगा शहर नगर निकाय बन गया। १८७५ में स्वतंत्र जिला बनने तक यह तिरहुत के साथ था। १९०८ में तिरहुत के प्रमंडल बनने पर इसे पटना प्रमंडल से हटाकर तिरहुत में शामिल कर लिया गया। स्वतंत्रता के पश्चात १९७२ में दरभंगा को प्रमंडल का दर्जा  देकर मधुबनी तथा समस्तीपुर को इसके अंतर्गत रखा गया।

दरभंगा जिले की अर्थव्यस्था कृषि आधारित  है | जिले में सिसम, खैर, पाल्मीरा और खजूर के पेड़ हैं। गांव के बस्तियों के पास आम, कंकड़, पिपल और इमली पाए जाते हैं । जिला में घास के मैदानों का क्षेत्र भी है। दरभंगा शहर मछली, आम और मखाना में अपने व्यापार के लिए उल्लेखनीय है।इस जिला में मुख्यतः धान, मखाना और आम का फसल होता है |

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