मधुबनी जिले का परिचय ----
मधुबनी जिले का परिचय ----
मधुबनी जिला दरभंगा प्रमंडल का हिस्सा है। इसका जिला मुख्यालय मधुबनी है। इस जिले में 5 अनुमंडल (मधुबनी, बेनीपट्टी, झंझारपुर, जयनगर एवं फुलपरास )और 21 प्रखंड (मधुबनी सदर (रहिका), पंडौल, बिस्फी, जयनगर, लदनिया, लौकहा, झंझारपुर, बेनीपट्टी, बासोपट्टी, राजनगर, मधेपुर, अंधराठाढ़ी, बाबूबरही, खुटौना, खजौली, घोघरडीहा, मधवापुर, हरलाखी, लौकही, लखनौर, फुलपरास, कलुआही) हैं। कुल 399 पंचायत और 11111 गांव हैं। जिले में 2 संसदीय और 11 विधानसभा क्षेत्र हैं। मधुबनी जले के उत्तर में नेपाल , दक्षिण में दरभंगा जिला , पूर्व में सुपौल जिला तथा पश्चिम में सीतामढ़ी जिला है। इस जिला का गठन 1972 में दरभंगा जिले के विभाजन के उपरांत हुआ था। इस जिले कुल क्षेत्रफल ३५०१ वर्ग किलोमीटर है जो भूकंप क्षेत्र ५ में पड़ता है। नदियों का यहाँ जाल बिछा है। समूचा जिला एक समतल एवं उपजाऊ क्षेत्र है। औसत सालाना १२७३ मिमी वर्षा का अधिकांश मॉनसून से प्राप्त होता है। इस जिले की प्रमिख नदियों में से कमला, करेह, बलान, भूतही बलान, गेहुंआ, सुपेन, त्रिशुला, जीवछ,और कोशी हैं । अधिकांश नदियाँ बरसात के दिनों में उग्र रूप धारण कर लेती है। कोशी नदी जिले की पूर्वी सीमा तथा अधवारा या छोटी बागमती पश्चिमी सीमा पर है।
मधुबनी शब्द मधु और वाणी से बना है। इसका मतलब होता है मधुर वाणी अर्थात मीठी जुबान। दरभंगा एवं मधुबनी को मैथिल -संस्कृति का द्विध्रुव माना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार पांडव अपने वनवास के दौरान वर्तमान जिला
और पंडौल के कुछ हिस्से में निवास किए थे।
मैथिली तथा हिंदी यहाँ की प्रमुख भाषा है। विश्व प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग एवं मखाना के पैदावार की वजह से मधुबनी को विश्व भर में जाना जाता है। मधुबनी चित्रकला मिथिलांचल क्षेत्र जैसे बिहार के दरभंगा, मधुबनी एवं नेपाल के कुछ क्षेत्रों की प्रमुख चित्रकला है। प्रारम्भ में रंगोली के रूप में रहने के बाद यह कला धीरे-धीरे आधुनिक रूप में कपड़ो, दीवारों एवं कागज पर उतर आई है। मिथिला की औरतों द्वारा शुरू की गई इस घरेलू चित्रकला को पुरुषों ने भी अपना लिया है। वर्तमान में मिथिला पेंटिंग के कलाकारों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मधुबनी व मिथिला पेंटिंग के सम्मान को और बढ़ाये जाने को लेकर तकरीबन 10,000 sq/ft में मधुबनी रेलवे स्टेशन के दीवारों को मिथिला पेंटिंग की कलाकृतियों से सराबोर किया। उनकी ये पहल निःशुल्क अर्थात श्रमदान के रूप में किया गया। श्रमदान स्वरूप किये गए इस अद्भुत कलाकृतियों को विदेशी पर्यटकों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है।

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